मध्यप्रदेश

बैंक में भी सुरक्षित नहीं डेटा:SBI की सोशल मीडिया पॉलिसी फेल, अफसरों का वाट्सएप नेटवर्क, ग्राहकों का डेटा लीक की आशंका ग्वालियर

बैंक में भी सुरक्षित नहीं डेटा:SBI की सोशल मीडिया पॉलिसी फेल, अफसरों का वाट्सएप नेटवर्क, ग्राहकों का डेटा लीक की आशंका ग्वालियर

त्रिलोक न्यूज़ सहायक प्रमुख मध्य प्रदेश

वॉट्सएप ग्रुप पर शेयर हो रहा बैंक और ग्राहक की डेटा।

ग्वालियर सहित भोपाल, इंदौर, जबलपुर में ऐसे ही बनाए हैं वाट्सएप ग्रुप

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के करोड़ों ग्राहकों के लिए बेहद चिंताजनक खबर है। देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक अपने ग्राहकों को डेटा सुरक्षा का भरोसा देता है, उसी बैंक में गोपनीय जानकारी सोशल मीडिया पर खुलेआम साझा की जा रही है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि एसबीआई के रीजनल मैनेजर बैंक के नाम से वाट्सऐप ग्रुप चल रहे हैं। ग्रुप में ग्राहकों का संवेदनशील डेटा, ऑफिशियल रिपोर्ट, टारगेट और आंतरिक जानकारियां शेयर हो रही है, जो बैंक की अपनी सोशल मीडिया पॉलिसी का सीधा उल्लंघन है।

एसबीआई की स्पष्ट नीति है कि किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैंक से जुड़ी कोई भी आंतरिक या ग्राहक संबंधी जानकारी साझा नहीं की जा सकती। इसके बावजूद ग्वालियर सहित पूरे मध्यप्रदेश में 100 से ज्यादा ग्रुप सक्रिय हैं। जिनमें बैंक का ऑफिशियल और गोपनीय डेटा डाला जा रहा है। इन ग्रुपों के एडमिन खुद रीजनल मैनेजर और वरिष्ठ अधिकारी हैं, जिससे मामला और गंभीर हो जाता है।

जानिए… क्या है नियम

एसबीआई के हेड ऑफिस ने सबसे पहले 27 जून 2014 को सभी शाखाओं के लिए आदेश जारी किया था। 3 फरवरी 2018, 8 जून 2018, 28 सितंबर 2018 और 24 जून 2019 को फिर आदेश जारी किया। नियमों के तहत कोई अधिकारी या कर्मचारी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर ग्राहकों से जुड़ी किसी भी जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। एसबीआई ने सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग को देखते हुए सभी कर्मचारियों के लिए एसबीआई के लोगो का उपयोग कर कोई ग्रुप, पेज या कम्युनिटी बनाना मना है। कर्मचारी केवल अपने असली नाम से प्रोफाइल बनाएंगे। इसमें बैंक का नाम, पद और बैंक के अधिकृत ईमेल के यूज पर रोक है।

शहर में 5 से ज्यादा ग्रुप सक्रिय, इनमें रोज होता है ग्राहकों का डेटा शेयर

  • ग्वालियर में कौन चला रहा ग्रुप: ग्वालियर में पांच से ज्यादा ऐसे ग्रुप सक्रिय हैं। ग्रुप्स से सैकड़ों बैंककर्मी जुड़े हुए हैं, जबकि संचालन की कमान रीजनल मैनेजर सहित चुनिंदा अधिकारियों के हाथों में है।
  • आर-वन ग्वालियर ग्लेडिएटर गुप: यह बड़ा बैंकिंग ग्रुप माना जा रहा है। इसमें करीब 130 सदस्य जुड़े हुए हैं। ग्रुप के एडमिन के तौर पर अनुराग शाह, प्रकाश शुक्ला और प्रदीप कुमार सहित कुल पांच लोग जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
  • आरबीओ-1 ऑपरेशन एंड एचआर ग्रुप: इसमें 85 बैंककर्मी शामिल हैं। ग्रुप का संचालन नरेंद्र सिंह, प्रदीप कुमार और अनुराग शाह द्वारा किया जा रहा है।
  • एफओ ऑफ टॉप एग्री इनसेंटिव ब्रांच ग्रुप: इसमें 91 कर्मचारी जुड़े हैं। इसके एडमिन पैनल में मनीष मदन, अखिलेश प्रसाद और धर्मेंद्र सहित कुल 9 लोग शामिल हैं। इनके अलावा भी शहर में बैंक से जुड़े कई अन्य वाट्सऐप और सोशल मीडिया ग्रुप चल रहे हैं। ग्रुप में बैंक से जुड़ी गतिविधियों और सूचनाओं का आदान–प्रदान किया जा रहा है। ग्राहकों का डाटा लीक हो रहा है।

प्रदेश में चल रहे 100 से ज्यादा ग्रुप

ग्वालियर के अलावा भोपाल मंडल, इंदौर मंडल, जबलपुर मंडल सहित लगभग पूरे मध्यप्रदेश में ऐसे वाट्सऐप ग्रुप सक्रिय बताए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश में एसबीआई की 800 से अधिक शाखाएं संचालित हैं। ग्वालियर जिले में एसबीआई की 41 ब्रांच हैं। हर रीजन के नाम पर अलग-अलग ग्रुप हैं। प्रदेश में करीब 100 से ज्यादा ग्रुप सक्रिय हैं।

एक्सपर्ट

ऑनलाइन ठग सक्रिय इसलिए खतरा ज्यादा

साइबर क्राइम एक्सपर्ट धर्मेन्द्र शर्मा का कहना है वाट्सएप ग्रुपों में बैंक का डेटा शेयर होने से ग्राहकों की जानकारी साइबर ठगों तक पहुंच सकती है। इससे फर्जी कॉल, फिशिंग लिंक और ओटीपी ठगी का खतरा बढ़ जाता है। आंतरिक रिपोर्ट और टारगेट लीक होने पर ठग खुद को एसबीआई अधिकारी बताकर ग्राहकों को धोखा दे सकते हैं। बीते एक साल में ऑनलाइन ठगी के लगभग 50 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। इनमें अधिकांश लोगों से बैंक मैनेजर बनकर ग्राहकों से ठगी हुई है।

रीजनल मैनेजर बोले- इस संबंध में कुछ नहीं कहूंगा

एसबीआई की सोशल मीडिया पॉलिसी को खुलेआम नजरअंदाज किया जा रहा है? बैंक के अपने नियमों के विपरीत अफसर वाट्सऐप ग्रुप्स पर संवेदनशील और आधिकारिक जानकारियां साझा कर रहे हैं? इस पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के रीजनल मैनेजर अनुराग शाह ने कहा कि मैं इस बारे में कोई भी जवाब नहीं दूंगा। आप तक कौन जानकारी पहुंचा रहा है? मैं उस पर कार्रवाई करूंगा। आप भी कई ग्रुप के एडमिन हैं? इस पर भी रीजनल मैनेजर कुछ नहीं बोले।

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